How is Karwa Chauth celebrated ?

India is the called the land of festivals. Many festivals celebrated throughout the country.One of them is Karwa chauth.Let us discuss something about Karwa chauth.It is a day long fast undertaken by married Hindu women who offer prayers seeking the welfare, prosperity, well-being, and long life of their husbands.

When it is celebrated:

The festival is basically marked on the fourth day following the poornima in the month of Kartik. Generally it falls in the month of October or November. This year it will be observed on 26th of October.

How it is celebrated:

Karwa Chauth MoonIt is one of the most important fast considered among the Indian womens.Married women keep the very tough fast to see as it starts before sunrise and ends after worshipping the moon, which usually rises at about 8.45 in night. No food or water is to be taken after 4 a.m. or after sunrise.

This fast is kept even in modern educated homes, becoming a symbol of the emotion that a woman feels for her husband. The puja place is decorated and the fast is broken only after seeing the moon. Finally, when the moon is sighted, the wife goes out to view it. The moon is worshiped and then she turns to view her husband’s face through the pores of a strainer, praying for his long life. After performing the puja, it’s finally time for food.

During the time of worship women  wear heavy saris or chunries in red , pink or other bridal colors, and adorn themselves with all other symbols of a married women like, nose pin, tika, bindi, chonp, bangles, earrings etc.Women also decorate their hands with Heena or mehndi.

So, how do you celebrate?

About Shweta Mohta

A housewife with a passion for travel, maps and India. She loves to find new places to visit, map the directions and can talk on, So you get smoother experience to Travel in India.

2 comments

  1. एक सुबह जब आँख खुली तो मेरे उड़ गये होश ,

    मेरे बीवी खड़ी सामने आँखों में भर के जोश !

    बोली मिस्टर कैसे हो और कैसी कटी है आपकी रात ,

    ना जाने क्यों कर रही थे मिश्री से मीठी बात !

    मैंने पूछा ओ डियर आज मैं तुमको क्यो भाया ,

    पलकें झुकए बड़ी शर्म से बोली करवाचौथ है आया !

    ये सुन कर मेरे शरीर मैं दौड़ उठा करेंट ,

    समझ गया था मेरे नाम का निकल चुका वारेंट!

    इस दिन का इंतजार हर शौहर को है रहता ,

    बड़ी अदब से बात मनती मैं जैसा-जैसा कहता !

    पूरा साल बीत गया था सुन -सुन के ताने ,

    आज कहे हर बात पे हाँ , ये मेरी ही माने !

    मुझे कभी परमेश्वर कहती कभी कहे देव ,

    खुद तो व्रत रखती पर मुझको देती सेब !

    शाम होते होते फिर वो घड़ी है आती ,

    गिफ्ट गिफ्ट का राग आलापे बाज़ार ले जाती !

    अहसानों के बोझ तले दब मुझ को आए रोना ,

    नहीं चाहते हुए भी लेना पड़े है महँगा सोना !

    देर रत जब चाँद ना निकले ये चाँद -चाँद चिल्लाए ,

    कभी भेजे नुक्कड़ पे मुझको कभी छत पे दौड़ाए !

    मैं भी जब दौड़- दौड़ के हो जाता परेशान ,

    हाथ जोड़ कर चाँद से बोलूं अब बात इसकी मान !

    आज तुम्हारा दिन है इसलिए खा रहे भाव ,

    कल से कौन पूछेगा तुम को जब आओ जब जाव !

    इतनी से बात क्यों मैडम के समझ ना आती ,

    जो साल भर प्यार जताती तो बात बन जाती !

  2. एक सुबह जब आँख खुली तो मेरे उड़ गये होश ,

    मेरे बीवी खड़ी सामने आँखों में भर के जोश !

    बोली मिस्टर कैसे हो और कैसी कटी है आपकी रात ,

    ना जाने क्यों कर रही थे मिश्री से मीठी बात !

    मैंने पूछा ओ डियर आज मैं तुमको क्यो भाया ,

    पलकें झुकए बड़ी शर्म से बोली करवाचौथ है आया !

    ये सुन कर मेरे शरीर मैं दौड़ उठा करेंट ,

    समझ गया था मेरे नाम का निकल चुका वारेंट!

    इस दिन का इंतजार हर शौहर को है रहता ,

    बड़ी अदब से बात मनती मैं जैसा-जैसा कहता !

    पूरा साल बीत गया था सुन -सुन के ताने ,

    आज कहे हर बात पे हाँ , ये मेरी ही माने !

    मुझे कभी परमेश्वर कहती कभी कहे देव ,

    खुद तो व्रत रखती पर मुझको देती सेब !

    शाम होते होते फिर वो घड़ी है आती ,

    गिफ्ट गिफ्ट का राग आलापे बाज़ार ले जाती !

    अहसानों के बोझ तले दब मुझ को आए रोना ,

    नहीं चाहते हुए भी लेना पड़े है महँगा सोना !

    देर रत जब चाँद ना निकले ये चाँद -चाँद चिल्लाए ,

    कभी भेजे नुक्कड़ पे मुझको कभी छत पे दौड़ाए !

    मैं भी जब दौड़- दौड़ के हो जाता परेशान ,

    हाथ जोड़ कर चाँद से बोलूं अब बात इसकी मान !

    आज तुम्हारा दिन है इसलिए खा रहे भाव ,

    कल से कौन पूछेगा तुम को जब आओ जब जाव !

    इतनी से बात क्यों मैडम के समझ ना आती ,

    जो साल भर प्यार जताती तो बात बन जाती !

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